Friday, 28 March 2014

तन्हाई

आसमान की गहराइयाँ
हवाओं की नरमाईयाँ
तारों के समंदर
कितना कुछ है इस पल के अंदर

इस सन्नाटे में भी कुछ बात है
मन के अंदर  एक एहसास है
इस लम्हे में कुछ ठहराव है
और एहसास में बदलाव है
होंठों पर कोई लफ्ज़ नहीं
फिर भी मन की एक आवाज़ है

इन पलों की गहराई
हवाओं की नरमाई
कभी कभी बहुत अच्छी लगती है
मुझे ये तन्हाई

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